सोमवार, जुलाई 26, 2010

हिन्दी लिखना सीख रही हूँ


क्यों चौंक गए ना ? बहुत दिनों से या सच कहें तो कई सालों से पापा ने मेरा ब्लॉग नहीं लिखा है। देखते-देखते मैं ६ साल की हो गयी हूँ। अगस्त में पहली क्लास में भी जाने लगूँगी । ३ साल पहले जब हिन्दी बोलना शुरू किया था तो रूक -रूक कर बोलती थी । मन में आये हर शब्द को पहले अंग्रेजी से हिन्दी में translate भी तो करना होता था । सच ये है कि अभी भी स्थिति वैसी ही है , बस अनुवाद करने कि स्पीड बढ़ गयी है । बाली मामा के ब्याह में भारत गयी थी , डेढ़ महीने रह कर आयी और सब से हिन्दी में बात भी की सो अब पहले से काफी अच्छा बोल रही हूँ ।
मेरा ब्लॉग अभी भी पापा लिखता है लेकिन जल्दी ही मैं खुद लिखने लगूँगी। अपना इंग्लिश वाला ब्लॉग तो अब खुद से लिख रही हूँ । पापा बस फोटो कोई-कोई फोटो लगा देता है ।

खैर जो मैं कहना चाहती थी वो बात तो पापा की भूमिका में ही अटक गयी। इतने -इतने दिनों के बात ब्लॉग लिखने से यही होता है । कहने को इतना कुछ होता कि आपको पता नहीं चलता कि कहाँ से शुरू करें । सो असली बात ये है कि अब मैं हिन्दी लिखना सीख रही हूँ । पापा कहता है कि हिंदी सीखना अंगरेजी सीखने से ज्यादा easy, मतलब कि सरल है । क्योंकि हिन्दी में जैसा बोलते हैं वैसा ही लिखते हैं । अब दो- दिन की हिन्दी लिखाई में ऐसा कुछ तो नहीं लगा है पर चलो पापा कहता है तो मान लेते हैं । अभी तो अ- आ , इ -ई ही सीखा है ।

मैं कोशिश करुँगी की जल्दी ही पढना- लिखना दोनों सीख जाऊँ। स्कूल की छुट्टियाँ हैं , दोस्तों के साथ दिन भर खेलना भी है । अब पापा कि मुस्तैदी पर है । जितना जल्दी सिखा देगा उतनी जल्दी सीख जाऊँगी। लेकिन जिस रफ़्तार और लगन से उसने मेरा ब्लॉग मेंटेन किया है उसे देखते हुए तो शायद 3-४ साल लग जाएँ वर्तनी सीखने में ही । आप लोगों का दबाव यदि बना रहेगा तो शायद वो इतनी ढीलाई न करे ।
अब सोने का टाइम हो गया है .