गुरुवार, अप्रैल 05, 2012

नयी साझेदारी

बहुत दिन हुए आप सब से बात किये .

श्रेया -शैतानी आखों में है 
देखते -देखते मेरी छोटी बहन श्रेया ३ साल की हो गयी है . जो लोग मेरे अंगरेजी वाले ब्लॉग पर जाते रहते हैं उन्हें तो खबर है , लेकिन आप लोगों में से कुछ लोगों को पता नहीं है शायद. श्रेया अब उसी उम्र की है जब पापा ने मेरा पहला हिन्दी ब्लॉग लिखा . तो परंपरा के अनुसार उसका भी एक ब्लॉग तो बन ही जाना चाहिए.

अब मुश्किल ये है कि पापा से मेरा ब्लॉग तो संभलता नहीं , श्रेया  का नया ब्लॉग जब तक बनेगा  तब तक  वो कॉलेज  जाने लगेगी और अपना चिठ्ठा खुद लिखेगी . सो मैंने सोचा की क्यों न इसी चिठ्ठे में हम दोनों बहनें लिखा करें। (मेरा मतलब है की पापा से लिखवाया करें ).  क-ख-ग  सीखना शुरू किया था लेकिन अब सब भूल गयी .
इस बार गरमी छुट्टी  में जरूर सीख लूँगी. हम लोग वैसे भी साथ-साथ ही पापा -ममी को तंग करते हैं , तो जाहिर है  कि हमारी कहानियाँ एक जैसी ही होंगी.

कुछ चीजें जरूर अलग हैं हम दोनों के बीच .
मसलन, गलती चाहे श्रेया की हो या मेरी , डांट मुझे ही पड़नी है .मुझे जो खिलौना अच्छा लग जाए , श्रेया को उसी वक्त, वही खिलौना चाहिए होता है. मैं पढ़ने बैठूं तो उसे उसी वक्त वही किताब चाहिए होती है, भले ही कुछ  समझ  में न  आये. मैं कई बार परेशान होकर चिल्लाती हूँ, लेकिन उसपर कोई असर नहीं होता. और होता भी है तो बस रोना शुरू कर देती है. मतलब - लो फिर डांट पड़ी. बड़ा होना इतना नुक्सान वाला धंधा क्यों है ?


डैडी की तरफ से
मेरा बचपन अब अपने खुद के डोमेन पर है -http://hindi.merabachapan.com/ .  पुराने  पोस्ट और उनके लिंक  स्वत: नई साईट पर अनुप्रेषित (redirect) हो जायेंगे. 

पिता कुम्भकर्णी निद्रा से साल -साल भर बाद जागते हैं और एक पोस्ट लिख देते हैं .हर बार नए पोस्ट के साथ  संकल्प होता है की अब से नियमित लिखा जाए .हर नए साल के संकल्प की तरह कि अब बहुत हुआ ,वजन कुछ कम होना चाहिए .शरीर तो हल्का नहीं हो पाया, अलबत्ता संकल्प जरूर हल्का होता गया है .
इस साल, ३ महीने बाद ही सही , ब्लॉग में कुछ तब्दीली है . वजन में भी कुछ नीचे का रुझान दिख रहा है. देखें, आने वाले चन्द महीनें  बतायेंगे कि लेखेनी और लेखक दोनों की  दिशा में स्थाई तबदीली हो पायी या नहीं . 






1 टिप्पणी:

RohitRanjan ने कहा…

Very impressive - liked reading it a lot.